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Thursday, June 6, 2013

Arz Kiya Hai

अर्ज़ किया है ...
गौर फ़रमायेगा ...
 देखा उन्होंने तिरछी नज़र से,
कसम खुद की मदहोश हो गए हम,
पर जब पता चला नज़र पर्मानेट  तिरछी है,

तो वही खड़े-खड़े बेहोश हो गए हम.

Chaand Badlo Me Kho Gaya

दिल के आँगन से चाँद का दीदार हो गया,

में उसका दीवाना हो गया,

चाँद बादलों में खो गया,

मैंने बादल हटने का इंतज़ार किया

तब तक चाँद किसी और का हो गया !

YE AANSU NA HOTE

 जो ना होती मोहब्बत ये आंसू न होते,
दिल भी न खोता आज तन्हा ना रोता,  
दीवानों सी अपनी ये हालत न होती,
अगर जहान में  कम्बखत ये मोहब्बत न होती,